Friday, February 5, 2010

हम भारतियों की विडम्बना..

इस देश की विडम्बना है, हम नेताओं को नेता बनाये रखने के लिये जितना खर्च और प्रयास करते हैं उतना हम देशवासियों का जीवन खुशहाल करने के लिये नहीं करते. हमारी सोच हमें अपने देश की तरफ कम मगर नेताओं की नेतागिरी की तरफ ज्यादा आकर्षित करता है. पैसा जो इन सफ़ेद पोशों पे खर्च होता है वो सभी भारतियों का है किन्तु हम देश वासियों के हाँथ सिवा आश्वासन और सपनों के कुछ भी नहीं..ये नेता हमारी हाथों में शब्दों की रेत हथेलियों पे डाल जाते हैं और किसी तमाशबीन की तरह मदारी का नाच देखते रहते हैं..जाने कब इस मायाजाल और भ्रम से हम भारतीय उभर पाएंगे....

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