... हासिल हर मंज़िल अनजाना करना ...
ज़िन्दगी में रास्ते तुम, चला अपना करना,
हासिल हर मंज़िल हमेशा अनजाना करना.
जवानी के मोड़ पे, जब राहों को तुम चुनो,
किसी की ख्वाइश बनो यही तमन्ना करना.
है मुमकिन कठिनाईयां साथ न छोड़ें कभी,
हुनर इन हाथों का,न कभी विराना करना.
सफ़र में शाम जल्द हो , और धुंद घिर जाये,
हौसले से अपनी बेबसी को,अनजाना करना.
ये दीवारें याद करेंगी, ये बहारें याद करेंगी,
अपनी इन यादों को, न कभी पुराना करना.
उम्मीद हो तुम हमारे अरमान हो जहाँ का,
अपने ज़मीर को न कभी तुम बेगाना करना.
दुआ है मेरी , तुम सूरज सा चमको दुनियाँ में,
अपने वुज़ुद को औरों के लिये नज़राना करना.
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