Monday, July 22, 2013


.....चादर रहनुमाई का ...
ग़म - ए- समंदर है यारा हरजाई का, 
अब तौबा करें उन की बेवफ़ाई का।
जवानी के दिन हैं वो गुमां में चलते हैं,
वाह!अदा हो तो उनकी अदाईगी का। 
दिल हाँथ ही क्यों ना मलता रह जाये,
क़ैद हम कर लेंगे वो अक्स ज़ुदाई का।
तक़दीर की बातें बुझदिल कीया करतें हैं,
आया है वक़्त हमारी हुनर आज़माई का।
वादों पर ही 'राज' चलो जी कर देख लेंगे,
आ भी जावो ओढ़ा दो चादर रहनुमाई का।
ग़म -ए- समंदर है यारा हरजाई का ...

Saturday, July 20, 2013


तेरे ज़मीर के मुक़ाबले दुनियाँ में होंगे बहुत,
मग़र कहीं एक घर तेरी परछाईं सा तो मिले।… Rajesh Srivastava

Friday, July 19, 2013

Division renders destiny unpredictable.

आये तो हम ज़हां में पर प्यार का यहाँ नाम नहीं,
ये तो अपना प्यारा भारत था कोई शमशान नहीं।

फिर आई है वो बारिश सावन की, 
तुम से जुड़ी यादों को मिटाने के लिये,
जाने क्यों ज़हन से वो मिटती नहीं?
मिट्टी पर उकेरी गईं उफ़! वो दुर्लभ तस्वीरों

Tuesday, July 16, 2013

अब हमें ये शहर क़म्बख्त! भाता नहीं है,
मोहब्बत है मगर उदास मन जाता नहीं है.

Thursday, July 11, 2013

नक़ाब में वो आते जाते हैं ज़िन्दगी की तरह,
ख़ुशी परवान हुई रहम-ए- शर्मिंदगी की तरह. 

Sunday, July 7, 2013


हैं कहाँ कोई मुक़द्दर जो मुक़म्मल हो?
चलो ढूंढे उसे हम इन रेत की दीवारों मे. 
यादें बहाना तलाशतीं हैं हसीं पल भुलाने को,
आँखें छलक उठतीं हैं, जाने क्यों हंसाने को?