Wednesday, September 18, 2013


उनका आईना उन्हें मुह दिखा न सका मग़र,
ये जनतंत्र "अधिकार" उन्हें रूह दिखा देगा।

Tuesday, September 10, 2013


ऐसी कोई नज़्म हो क़फ़न से छुड़ाकर ले आये,
बेआबरू आँखों को ख़ाबों से सजाकर ले आये.
नाम जो लें उनका कुछ रूमानियत छा जाये,
काश यादें हमारी उनकी नींदें चुराकर ले आये.
वो हैं ज़ुदा ज़ुदा मग़र दूर नहीं हमारे ख़यालों से,
है कोई ख़ुदा? दुनियाँ से उन्हें छुपाकर ले आये.
माना, ख़्वाइशें शोहरतों सी बेनाम दफ़न होंगी,
जवानी चार दिन की फिर कोई बुलाकर ले आये.
हम शाही राह नहीं मंजिल की रहती हमें तलाश,
लड़खड़ायें जो 'गर वो चराग़ जलाकर ले आये.
डर था कहीं बिख़र न जाऊ सूखे पत्तों की तरह,
वो हर चिंगारी राज दुनियाँ से बुझाकर ले आये.

आज भागलपुर की हालत देख कर मन बहुत दुखी हुआ और अनायास ही पूछ बैठा ....

नाथ सुना मैं अस सिव पाहीं। महा प्रलयहुं नास तव नाहीं।।
मुधा बचन नहिं ईश्वर कहई। सोई मोरें मन संसय अहई ॥ ... (रामायण - उत्तरकाण्ड)

इस प्रकरण में गरुड़, भुशुणिडजी से पूछ रहे हैं।  हे नाथ! मैंने शिवजी से ऐसा सुना है कि महाप्रलय में भी आप का नाश नहीं होता और ईश्वर (शिव जी) कभी मिथ्या वचन कहते नहीं। वह भी मेरे मन में संदेह है।
क्या यह पंक्ति आज इस युग में भी चरितार्थ है? क्या ईश्वर आज इस युग में भी जीवित हैं? और अगर हैं किसी भी नाम से तो फिर आज जीवित रहते हुये भी अपने सेवकों की पीड़ा नहीं देख पा रहा? क्या इस से भी बुरा हाल किसी शहर का हो सकता है?

Monday, September 9, 2013

ऐसी कोई नज़्म हो क़फ़न से छुड़ाकर ले आये,
बेआबरू आँखों को ख़ाबों से सजाकर ले आये. 
लब्ज़ जो निकलें तो थोड़ी आशिक़ी छा जाये,
काश! चाहत मेरी उनकी नींदें चुराकर ले आये. 
डर था कहीं बिख़र न जाऊ सूखे पत्तों की तरह,
वो तो हर चिंगारी दुनियाँ से बुझाकर ले आये.

Wednesday, September 4, 2013

When the dawn awaits you beyond your darkness,
When your soul beckons you in times of weaknesses, 
When the world leaves you stranded in its crowd of melancholy,
Then the harmony of Knowledge will be your lone Companion.
HAPPY TEACHERS DAY…… Srivastava Rajesh
ना सरहदें छीन सकीं हमारी यादें,
ना वक़्त अनसुनी कर सकीं फ़रियादें।

Monday, September 2, 2013

रेख़ाओं में 'ग़र कोई जान न होती,
सूखे पत्तेे फ़िर पाँव तले कराहते नहीं।.... Rajesh Srivastava