Tuesday, September 10, 2013


आज भागलपुर की हालत देख कर मन बहुत दुखी हुआ और अनायास ही पूछ बैठा ....

नाथ सुना मैं अस सिव पाहीं। महा प्रलयहुं नास तव नाहीं।।
मुधा बचन नहिं ईश्वर कहई। सोई मोरें मन संसय अहई ॥ ... (रामायण - उत्तरकाण्ड)

इस प्रकरण में गरुड़, भुशुणिडजी से पूछ रहे हैं।  हे नाथ! मैंने शिवजी से ऐसा सुना है कि महाप्रलय में भी आप का नाश नहीं होता और ईश्वर (शिव जी) कभी मिथ्या वचन कहते नहीं। वह भी मेरे मन में संदेह है।
क्या यह पंक्ति आज इस युग में भी चरितार्थ है? क्या ईश्वर आज इस युग में भी जीवित हैं? और अगर हैं किसी भी नाम से तो फिर आज जीवित रहते हुये भी अपने सेवकों की पीड़ा नहीं देख पा रहा? क्या इस से भी बुरा हाल किसी शहर का हो सकता है?

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