Adhure Ehsaas
Tuesday, October 8, 2013
बेदाग़ मोहब्बत की शिफ़ारिश करूँ तो करूँ कैसे?
दिल को भटकने की गुज़ारिश करूँ तो करूँ कैसे?
हर ज़ख्म पर हम हँस लेते हैं कुछ नमक लगा कर,
सिल कर होटों को साजिश करूँ तो करूँ कैसे?
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