Thursday, May 30, 2013

मन बनाइये की अब तो बदलाव ज़रूरी है,
सामाजिक सुख चैन का बहाव ज़रूरी है।
कभी ना भ्रष्ट वादाखिलाफों का नाम होगा,
अब तो पार लगे जनता की नाव ज़रूरी है। 

Sunday, May 26, 2013

यहाँ, "सभी चीजें बिकाऊ है" बिलकुल सही फ़रमाया हम सभी ने। इसी "बिकाऊ" होने की वज़ह से समाज गिरता चला जा रहा है बिना किसी रोक टोक के पतन की राह पर। जब ज़मीर ही बिकने लगा तो फिर और क्या बचा? अभी भी भारतीय समाज अगर बचा हुवा है तो संभवतः हम सभी के पूर्वजों के कर्म बेशकीमती रहे होंगे। देश और समाज जितना भी बचा हुवा है, चलिए अपने अपने छोटे दायरों में उसे हम और गिरने न दें। बिकने दीजिये बिकने वालों को लेकिन इस नवजवान पीड़ी में इतने संस्कार जरुर बाँट दीजिये ताकी इस "बाज़ार" पर मंदी छा जाये और पौराणिक संस्कारों के बोझ तले ये खुद ब खुद मर जाये। इस बाज़ार को कमज़ोर करने के लिए "मेहनत" की जरुरत नहीं बस "इच्छा" की ज़रूरत है, जो हम सभी में प्रचुर मात्रा में हमारे माता पिता और शिक्षक ने भर रखा है। चलिए मान लिया जाये आज की सुबह आने वाले अच्छे दिनों की शुरुआत है। 

Wednesday, May 22, 2013

Let us pass on the mantle of Country's leadership in safe hands…Srivastava Rajesh

Tuesday, May 21, 2013

चले जिन राहों में वो मुक़म्मल कहाँ रहे,
जो पत्थरों को तोड़ दें वो दिल कहाँ रहे।

Monday, May 20, 2013

हर मोड़ पर मिले मोहब्बत से डसने वाले,
वो खून पी गए और हमें पता भी न चला.

Sunday, May 19, 2013

Meditate in compassion; for we are all born to spread Nature's love. Mother earth eagerly awaits for us to awaken to our worldly commitments, before we sleep forever in ashes of time and get drowned deep, deep into Salvation.. Srivastava Rajesh

Wednesday, May 8, 2013

We as neighbours fight for space in other neighbour's domain; what if we fought for collective rights of India as a Nation…. Srivastava Rajesh