Adhure Ehsaas
Friday, July 19, 2013
Division renders destiny unpredictable.
आये तो हम ज़हां में पर प्यार का यहाँ नाम नहीं,
ये तो अपना प्यारा भारत था कोई शमशान नहीं।
फिर आई है वो बारिश सावन की,
तुम से जुड़ी यादों को मिटाने के लिये,
जाने क्यों ज़हन से वो मिटती नहीं?
मिट्टी पर उकेरी गईं उफ़! वो दुर्लभ तस्वीरों
Tuesday, July 16, 2013
अब हमें ये शहर क़म्बख्त!
भाता नहीं है,
मोहब्बत है मगर उदास मन जाता नहीं है.
Thursday, July 11, 2013
नक़ाब में वो
आते जाते
हैं ज़िन्दगी की तरह,
ख़ुशी परवान हुई रहम-ए- शर्मिंदगी की तरह.
Sunday, July 7, 2013
हैं कहाँ कोई मुक़द्दर जो मुक़म्मल हो?
चलो ढूंढे उसे हम इन रेत की दीवारों मे.
यादें बहाना तलाशतीं हैं हसीं पल भुलाने को,
आँखें छलक उठतीं
हैं, जाने क्यों हंसाने
को?
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